हिमाचल की खौफनाक खाई 'शैतान खड्ड' में,
एक अघोरी तांत्रिक पूरे सैंतीस साल से इस आधी रात का इंतज़ार कर रहा था।
ठीक रात 11:59 बजे दुर्लभ जड़ी-बूटियों के हवन से उसे मिलनी थी ब्रह्मांड की सबसे बड़ी शक्ति—'दिव्य-दृष्टि'।
लेकिन किस्मत का खेल देखिए! ठीक उसी सेकंड, ऊपर पहाड़ी मोड़ पर एक बेकाबू ट्रक ने बाईस साल के मोटो-ब्लॉगर कबीर को टक्कर मार दी!
कबीर हवा में उछला और सीधे तांत्रिक के धधकते नीले हवन-कुंड में जा गिरा।
घने धुएं की वजह से तांत्रिक कुछ देख नहीं सका और खाली हाथ लौट गया, जबकि वो अलौकिक वरदान कबीर के जिस्म और आँखों में समा चुका था।
रात के सैलाब में बहकर कबीर एक पहाड़ी गांव पहुँचा, जहाँ तीखी जुबान वाली तारा ने उसकी जान बचाई।
कबीर यही समझा कि वो नदी में गिरा था...
लेकिन दस दिन बाद दिल्ली के कमरे में, जब उसकी आँखें ईंट की दीवारों और इंसानी हड्डियों के आर-पार देखने लगीं, तो उसकी रूह कांप उठी! उसे याद आ गया...
वो पानी में नहीं, ज़िंदा आग में गिरा था! Read Full Story

